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चलु सखि हिल मिल जनक के आँगन

 चलु सखि हिल मिल जनकके आँगन , दूल्हा बनल श्री राम हे।   2

1, दुहि किशोर बीच एलै बशिष्ठ गुरु। 2

एक गोर एक छथि श्याम है।  दूल्हा बनल श्री राम हे।   2


2, देश विदेश केर,  भूप सब ऐले सखि  2

धूरि खा के गैला , निज धाम है 

जे शिव धनुष छूबैत काल टूटि गैले

रहि गइले सिया जी केर मान है

दूल्हा बनल श्री राम हे।   2


3, रंग बिरंग केर,  बाज गैले साज सखि 2

बरसल सुमन आकाश है

दैहिक बैदिक आज सब मिट गैल, मिट गैल तीनो पाप है

दूल्हा बनल श्री राम हे।   2


चलु सखि हिल मिल जनकके आँगन , दूल्हा बनल श्री राम हे।  



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