जय जय भैरवि असूर भयाउनि पशुपति भामिनि माया 2 सहज सुमति वर दिय हे गोसाउनि अनुगति गति तुव पाया जय जय भैरवि असूर भयाउनि बासर रैनि सबसन शोभित 2 चरण चन्द्रमणि चूड़ा कतओक दैत्य मारि मुँह मयललि कतओ उगिली करू कूड़ा सावर वरन नयन अनुरंजित जलद जोग फूलकोका कट कट विकट ओठ पुट पौण्डरी लिधुर फेल उठ फौका जय जय भैरवि असूर भयाउनि घन घन घनन घुंघरू कत बाजय 2 हन हन कर तुओं काता विद्यापति कवि तुव पद सेवक 2 पुत्र विसरु जनु माता जय जय भैरवि असूर भयाउनि पशुपति भामिनि माया 2 सहज सुमति वर दिय हे गोसाउनि अनुगति गति तुव पाया जय